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About Us

विद्यालय की दैनिक प्रार्थना

वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्तव्य मार्ग पर डट जावें।
पर सेवा पर उपकार में हम,जग जीवन सफल बना जावें।।
हम दीन दुखी निबलों बिकलों, के सेवक बन संताप हरें।
जो हैं अटके भूले भटके, उनको तारें खुद तर जावें।।
छल दंभ द्वेष पाखंड झूठ, अन्याय से निशदिन दूर रहें।
जीवन हो शुद्ध सरल अपना, शुचि प्रेम सुधा रस बरसावें।।
हम पढ़ें लिखें विद्वान बने, विद्या का विमल प्रचार करें,
अज्ञान अविद्या दूर करें, निशदिन ही तेरे गुण गावें।।
निज आन मान मर्यादा का, प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहे।
जिस देश जाति में जन्म लिया, बलिदान उसी पर हो जावें।
वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्तव्य मार्ग पर डट जावें।
पर सेवा पर उपकार में हम,जग जीवन सफल बना जावें।।

विद्यालय भवन

विद्यालय का अपना एक हरा-भरा, सुसज्जित विशाल भवन है, जो तीन खंडों में विभाजित है। जिसमें पुराना भवन- कक्ष संख्या 01 से 10 तक है। दूसरा नवीन भवन- कक्ष संख्या 15 से 40 तक है। तीसरा बालिका विभाग- कक्ष संख्या 1 से 24 तक तथा 2 कक्ष व्यवसायिक शिक्षा हेतु निर्मित हैं। खेलकूद एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों हेतु विशाल क्रीड़ांगन तथा कृषि वर्ग के छात्रों के लिए प्रयोगात्मक कार्य हेतु विस्तृत कृषि फार्म की भी व्यवस्था है। विद्यालय में सभी आवश्यक एवं आधुनिक उपकरणों एवं साधनों से सुसज्जित भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, जंतुविज्ञान की प्रयोगाशालाएं उपलब्ध हैं।

शैक्षिक पाठ्यक्रम:

1.हाई स्कूल – हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, चित्रकला, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संगीत (गायन), गणित, गृह-विज्ञान, कृषि एवं कंप्यूटर।

2.इंटरमीडिएट –
(क) साहित्य वर्ग – हिन्दी, अंग्रेजी, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, नागरिकशास्त्र, कंप्यूटर, चित्रकला, गृह विज्ञान एवं संस्कृत।

(ख) विज्ञान वर्ग – सामान्य हिन्दी, अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित।

(ग) कृषि वर्ग – समस्त अनिवार्य विषय।

(घ) व्यावसायिक वर्ग – (अ)फार्मेसी, बहुद्देशीय स्वास्थ्य कार्मिक मेडिकल लेबोरेटरी तकनीक सहित (बालकों हेतु)
(ब) एनटीटी, शिक्षण प्रशिक्षण एवं शिशु प्रबंधन (बालिकाओं हेतु)

नोट- कक्षा 9 से 12 तक सभी छात्र-छात्राओं को खेल तथा शारीरिक शिक्षा विषय अनिवार्य रूप से लेकर इसकी परीक्षा में सम्मिलित होना अनिवार्य है।

पाठ्य सहगामी क्रियाऐं

पाठ्य सहगामी क्रियाएं वह गतिविधियां हैं जो पठन पाठन की क्रियाओं के साथ-साथ चलती हैं और जिनका उद्देश्य छात्र को पुस्तकीय शिक्षा के साथ व्यावहारिक जीवन के लिए तैयार करना होता है। विद्यालय में निम्नलिखित पाठ्य सहगामी क्रियाओं की व्यवस्था है-

एनसीसी- विद्यालय में कक्षा 11 तथा कक्षा 12 के कुल 100 छात्र-छात्राओं हेतु एनसीसी प्रशिक्षण की व्यवस्था है।

एनएसएस- राष्ट्रीय सेवा योजना के इस कार्यक्रम में कक्षा 11 तथा कक्षा 12 के 200 छात्र- छात्राओं के प्रशिक्षण की व्यवस्था है

स्काउटिंग- इसके अंतर्गत छात्र छत्राओं को प्रशिक्षण देकर स्काउटिंग कार्यक्रम विद्यालय एवं जिला स्तर पर संपन्न होते हैं।

खेलकूद- प्रतिदिन विद्यालय के क्रीड़ांगन में सायंकाल में फुटबाल, हाकी, बास्केटबाल, वॉलीबॉल, बास्केटबाल एवं एथलीट आदि का अभ्यास खेल प्रशिक्षकों द्वारा कराया जाता है।

विद्यालय-गणवेश

विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं को विद्यालय द्वारा निर्धारित गणवेश में आना अनिवार्य है।

1- छात्र गणवेश- नीली शर्ट, खाकी पैंट, नेवी ब्लू स्वेटर (शीतकाल में), काले जूते, सफेद मोजे।

2- छात्राओं का गणवेश- नीला कुर्ता, सफेद सलवार, सफेद दुपट्टा, नेवी ब्लू स्वेटर (शीतकाल में), सफेद कपड़े के जूते, सफेद मोजे।

विद्यार्थियों हेतु आवश्यक दिशा निर्देश

1- विद्यालय में सभी छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन निर्धारित गणवेश में समय से उपस्थित होना अनिवार्य है।

2- विद्यालय में छात्र-छात्राओं के पास उनका परिचय पत्र अनिवार्य रूप से रहना चाहिए।

3- छात्र-छात्राओं द्वारा विद्यालय में मोबाइल फोन लाना पूर्णतः वर्जित है, जांच के समय यदि मोबाइल फोन पाया गया तो उसका अधिग्रहण कर लिया जाएगा।

4- खाली पीरियड में छात्र-छात्राएं शांतिपूर्वक अपनी कक्षा में बैठकर स्वाध्याय करेंगे।

5- छात्र-छात्राएं अपनी साइकिल निर्धारित साइकिल स्टैंड पर खड़ी करेंगे, जिसका वार्षिक शुल्क प्रत्येक छात्र-छात्रा को अनिवार्य रूप से 30 जुलाई तक जमा करना अनिवार्य होगा।

6- लगातार 10 दिन अनुपस्थित रहने पर छात्र-छात्रा का नाम विद्यालय से पृथक कर दिया जाएगा।

7- प्रत्येक माह में छात्र-छात्राओं की विद्यालय में 75% उपस्थिति अनिवार्य है। उपस्थिति पूरी न होने पर उसको परीक्षा से वंचित किया जा सकता है।

8- विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं को विद्यालय द्वारा निर्धारित नियमों तथा दिशा-निर्देशों का पालन करना एवं अनुशासन को बनाए रखना अनिवार्य है।

विद्यालय का संक्षिप्त इतिहास

लखीमपुर खीरी जनपद के ग्रामीण अंचल में अधिवासित कृषक तथा जनसामान्य वर्ग के पाल्यों तक शिक्षा का आलोक पहुंचाने के उद्देश्य से सन 1949 में इस विद्यालय की स्थापना, श्री बाल गोविंद वर्मा जी ( पूर्व केंद्रीय उप मंत्री, संचार विभाग, भारत सरकार) के अथक प्रयासों से संपन्न हुई। विद्यालय की स्थापना में श्री भगवानदीन वर्मा जी, श्री राम किशोर सिंह जी, श्री छोटेलाल वर्मा जी एवं श्री द्वारिका सिंह जी आदि का भी अति महत्वपूर्ण योगदान रहा। कृषि तथा कृषकों से जुड़े क्षेत्र होने के कारण विद्यालय के नामकरण में भी कृषक समाज पदावली को प्रमुखता दी गयी और विद्यालय में प्रथम दृष्ट्या कृषि शिक्षा की समुचित व्यवस्था की गयी। विद्यालय को जनपद में एकमात्र राज्य सरकार अनुदान कृषि विद्यालय होने का गौरव प्राप्त है।
सन 1949 में विद्यालय जूनियर हाई स्कूल के रूप में स्थापित हुआ। सन 1955 में विद्यालय हाईस्कूल कृषि वर्ग की मान्यता में सम्मिलित हुआ, सन 1958 में हाईस्कूल साहित्य वर्ग की तथा सन 1966 में हाईस्कूल विज्ञान वर्ग की मान्यता प्राप्त हुई। सन 1962 में इंटरमीडिएट कृषि वर्ग की मान्यता प्राप्त हुयी। सन 1966 में इण्टर साहित्य वर्ग और सन 1972 में इण्टर विज्ञान वर्ग की मान्यता प्राप्त हुई। सन 1967 से 1969 तक विद्यालय में बीटीसी ट्रेनिंग का कार्यक्रम भी संचालित हुआ। सन 1997 में इंटरमीडिएट स्तर पर व्यवसायिक शिक्षा की व्यवस्था भी शासन द्वारा की गई।
वर्तमान समय में विद्यालय में साहित्य, विज्ञान, कृषि एवं व्यवसायिक वर्ग के अंतर्गत इंटरमीडिएट तक की शिक्षा व्यवस्था का प्रबंध है। बालिकाओं की शिक्षा हेतु प्रथक से ‘बालिका विभाग’ की व्यवस्था है।
विद्यालय में प्रतिवर्ष हाईस्कूल तथा इंटरमीडियट की परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को, विद्यालय द्वारा रजत पदक देकर सम्मानित किया जाता है। चूंकि हमारा संकल्प ग्रामीण, साधन हीन तथा कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं को प्रवेश देकर उन्हें अच्छी शिक्षा प्रदान करना तथा उन्हें उत्तम जीवन के लिए प्रस्तुत करना है।

युग-परिवर्तक, युग-संस्थापक
युग संचालक, हे युगाधार !
युग-निर्माता, युग-मूर्ति तुम्हें
युग युग तक युग का नमस्कार !

प्रखर प्रज्ञा के धनी, दूरदर्शी, महान कर्मयोगी श्री बालगोविन्द वर्मा जी के जीवन संघर्ष को सोहन लाल द्विवेदी उपर्युक्त पंक्तियाँ बखूबी व्यक्त करती हैं। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जैसे पिछड़े क्षेत्र में आप एक दीपक की भांति कांतिमान हुये और अपनी ईमानदार राजनीति की बदौलत इस क्षेत्र का यथासम्भव विकास किया। जनपद में व्याप्त अशिक्षा के वातावरण को दूर करने के लिए आपने अपने जीवन की शुरुआत एक अध्यापक के रूप में की। अध्यापन कार्य के दौरान आपने क्षेत्र की गरीब जनता की उन समस्याओं को समझा जो क्षेत्र की शिक्षा में बाधक बन रही थीं। उन समस्याओं से प्रेरित होकर आपने सर्वसमावेशी सामाजिक विचारों एवं सहकारिता के सिद्धांत का पालन करते हुए लखीमपुर खीरी जनपद की कृषक जनता के बच्चों की उत्तम शिक्षा व्यवस्था के लिए अपने एवं प्रयासों से 1949 ई० में कृषक समाज एडुकेशनल सोसायटी की स्थापना कर गोला गोकर्णनाथ में कृषक समाज इंटर कॉलेज नाम से एक पौधा रोपित किया, जो आज विशालकाय वट वृक्ष के रूप में समस्त क्षेत्र वासियों को अपनी शिक्षा दीक्षा से अभिसिंचित कर रहा है और लगातार प्रगति कर रहा है। आप इस विद्यालय के संस्थापक प्रधानाचार्य रहे। आगामी जीवन मे आप ने जनपद में कांग्रेस पार्टी की राजनैतिक गतिविधियों में भाग लेना आरम्भ किया और अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की। अपने राजनैतिक जीवन मे आप एक सफल एवं अत्यंत लोकप्रिय राजनेता के रूप में स्थापित हुए। परिणाम स्वरूप 1962 से 1980 तक आप लगातार लोकसभा सदस्य तथा इसी समयावधि में आप केंद्रीय उपमंत्री संचार विभाग, भारत सरकार के पद पर भी रहे।
अपनी कर्तव्यनिष्ठा, कार्य शुचिता एवं ईमानदारी जैसे गुणों को अपनी राजनीति में समाहित कर नए प्रतिमान स्थापित किये। भारत माँ के इस महान सपूत को शत शत नमन।