विद्यालय का संक्षिप्त इतिहास

लखीमपुर खीरी जनपद के ग्रामीण अंचल में अधिवासित कृषक तथा जनसामान्य वर्ग के पाल्यों तक शिक्षा का आलोक पहुंचाने के उद्देश्य से सन 1949 में इस विद्यालय की स्थापना, श्री बाल गोविंद वर्मा जी ( पूर्व केंद्रीय उप मंत्री, संचार विभाग, भारत सरकार) के अथक प्रयासों से संपन्न हुई। विद्यालय की स्थापना में श्री भगवानदीन वर्मा जी, श्री राम किशोर सिंह जी, श्री छोटेलाल वर्मा जी एवं श्री द्वारिका सिंह जी आदि का भी अति महत्वपूर्ण योगदान रहा। कृषि तथा कृषकों से जुड़े क्षेत्र होने के कारण विद्यालय के नामकरण में भी कृषक समाज पदावली को प्रमुखता दी गयी और विद्यालय में प्रथम दृष्ट्या कृषि शिक्षा की समुचित व्यवस्था की गयी। विद्यालय को जनपद में एकमात्र राज्य सरकार अनुदान कृषि विद्यालय होने का गौरव प्राप्त है।
सन 1949 में विद्यालय जूनियर हाई स्कूल के रूप में स्थापित हुआ। सन 1955 में विद्यालय हाईस्कूल कृषि वर्ग की मान्यता में सम्मिलित हुआ, सन 1958 में हाईस्कूल साहित्य वर्ग की तथा सन 1966 में हाईस्कूल विज्ञान वर्ग की मान्यता प्राप्त हुई। सन 1962 में इंटरमीडिएट कृषि वर्ग की मान्यता प्राप्त हुयी। सन 1966 में इण्टर साहित्य वर्ग और सन 1972 में इण्टर विज्ञान वर्ग की मान्यता प्राप्त हुई। सन 1967 से 1969 तक विद्यालय में बीटीसी ट्रेनिंग का कार्यक्रम भी संचालित हुआ। सन 1997 में इंटरमीडिएट स्तर पर व्यवसायिक शिक्षा की व्यवस्था भी शासन द्वारा की गई।
वर्तमान समय में विद्यालय में साहित्य, विज्ञान, कृषि एवं व्यवसायिक वर्ग के अंतर्गत इंटरमीडिएट तक की शिक्षा व्यवस्था का प्रबंध है। बालिकाओं की शिक्षा हेतु प्रथक से ‘बालिका विभाग’ की व्यवस्था है।
विद्यालय में प्रतिवर्ष हाईस्कूल तथा इंटरमीडियट की परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को, विद्यालय द्वारा रजत पदक देकर सम्मानित किया जाता है। चूंकि हमारा संकल्प ग्रामीण, साधन हीन तथा कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं को प्रवेश देकर उन्हें अच्छी शिक्षा प्रदान करना तथा उन्हें उत्तम जीवन के लिए प्रस्तुत करना है।

युग-परिवर्तक, युग-संस्थापक
युग संचालक, हे युगाधार !
युग-निर्माता, युग-मूर्ति तुम्हें
युग युग तक युग का नमस्कार !

प्रखर प्रज्ञा के धनी, दूरदर्शी, महान कर्मयोगी श्री बालगोविन्द वर्मा जी के जीवन संघर्ष को सोहन लाल द्विवेदी उपर्युक्त पंक्तियाँ बखूबी व्यक्त करती हैं। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जैसे पिछड़े क्षेत्र में आप एक दीपक की भांति कांतिमान हुये और अपनी ईमानदार राजनीति की बदौलत इस क्षेत्र का यथासम्भव विकास किया। जनपद में व्याप्त अशिक्षा के वातावरण को दूर करने के लिए आपने अपने जीवन की शुरुआत एक अध्यापक के रूप में की। अध्यापन कार्य के दौरान आपने क्षेत्र की गरीब जनता की उन समस्याओं को समझा जो क्षेत्र की शिक्षा में बाधक बन रही थीं। उन समस्याओं से प्रेरित होकर आपने सर्वसमावेशी सामाजिक विचारों एवं सहकारिता के सिद्धांत का पालन करते हुए लखीमपुर खीरी जनपद की कृषक जनता के बच्चों की उत्तम शिक्षा व्यवस्था के लिए अपने एवं प्रयासों से 1949 ई० में कृषक समाज एडुकेशनल सोसायटी की स्थापना कर गोला गोकर्णनाथ में कृषक समाज इंटर कॉलेज नाम से एक पौधा रोपित किया, जो आज विशालकाय वट वृक्ष के रूप में समस्त क्षेत्र वासियों को अपनी शिक्षा दीक्षा से अभिसिंचित कर रहा है और लगातार प्रगति कर रहा है। आप इस विद्यालय के संस्थापक प्रधानाचार्य रहे। आगामी जीवन मे आप ने जनपद में कांग्रेस पार्टी की राजनैतिक गतिविधियों में भाग लेना आरम्भ किया और अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की। अपने राजनैतिक जीवन मे आप एक सफल एवं अत्यंत लोकप्रिय राजनेता के रूप में स्थापित हुए। परिणाम स्वरूप 1962 से 1980 तक आप लगातार लोकसभा सदस्य तथा इसी समयावधि में आप केंद्रीय उपमंत्री संचार विभाग, भारत सरकार के पद पर भी रहे।
अपनी कर्तव्यनिष्ठा, कार्य शुचिता एवं ईमानदारी जैसे गुणों को अपनी राजनीति में समाहित कर नए प्रतिमान स्थापित किये। भारत माँ के इस महान सपूत को शत शत नमन।